एक रिश्ता ऐसा भी…..


आखिरी वर्ष के आखिरी दिन भी आ ही गए जब ISM से सिर्फ clearance लेना ही बचा है. पांच साल कैसे बीते पता भी न चला. जब ISM में नामाकंन लिया था तब शायद नए कॉलेज का उत्साह था मगर धीरे धीरे ये उत्साह बोरियत में बदलने लगा और किसी तरह भी पढाई जल्दी खत्म करके जाने की इच्छा प्रबल होने लगी. पर न जाने अब क्या हो गया है‼ अब क्यूँ मन ये कह रहा है कि “रुक जा अभी, अभी दिन ढला नहीं, कहाँ चला तू इन लम्हों को छोडकर ”. ऐसा लग रहा है मानो कॉलेज की हर निर्जीव वास्तु में भी जान आ गयी है और वो मुझसे एक ही प्रश्न पूछ रही है – छोडकर जा रहे हो; मुझसे मिलने आओगे न? मुझे भूलोगे तो नहीं?  हर उस ख्याल से दिल भर जा रहा है जिसमे यहाँ बिताए गए जिंदगी के रिश्ते बन गए हैं.

यह कौन सा रिश्ता है मैं भी इसे समझने में असक्षम हूँ, इस रिश्ते को क्या नाम दूं मुझे नहीं पता. बस यही पता ही की यह एक अटूट रिश्ता बन चूका है जो भुलाये न भूले.

यहाँ से निकलने के बाद अगर कुछ विशिष्ट लोगो की कमी खलेगी तो वो मेरे कनिष्ठ मित्र (जुनिअर्स) हैं. अपने वर्ग के मित्रों से मुलाकात कहीं न कही किसी मोड पर हो जाएगी पर कनिष्ठ मित्र से मिलने वाली मोड खोजना भी आसान नहीं होगा. सभी विभिन्न विभाग के हैं और व्यवसायिक जीवन में मिलन लगभग असंभव है. यह लोग जीवन के कुछ अभिन्न अंग बन चुके हैं जो दिल में हमेशा के लिए बस गए हैं. उनके सहयोग से किये हर कार्य की सफलता उनके बिना अधूरी थी. मुझे अपने दल और संगठन में एक दूसरा परिवार मिल गया है, और इस परिवार से विदाई लेना शायद आसान नहीं होगा….

कुछ दिन पहले एक कनिष्ट मित्र ने मेरे समक्ष एक प्रश्न रखा था की मैं ISM छोडकर जाने वाला हूँ, तो कैसा महसूस कर रहा हूँ. उस वक्त मेरे पास उसके उत्तर के लिए कोई शब्द नहीं थे और न ही अभी तक मैं शब्द खोज पाया हूँ. बस इतना ही जान पा रहा हूँ “अभी मेरे जिंदगी में दो पालने हैं – एक पालने में नयी जिंदगी की शुरुआत करने की खुशी है तो दूसरे पलने में ISM की जिंदगी को छोडकर जाने का गम. और जैसे –जैसे जाने के दिन नजदीक आ रहे हैं दूसरा पल्ला भारी होता जा रहा है”.

हर उस गम को कई अटूट रिश्ते स्थापित करने की खुशी धक् देती है, बस एक यही गम रह जाता है की उस रिश्ते के साथ शायद अपने मन के मुताबिक वक्त न बिता पाऊं.

आखिर जिंदगी इसी का नाम है, लोग आते रहेंगे जाते रहेंगे, और उनसे हर एक मिलन मानस पटल पर एक छाप छोड़ जाएगी. उन हर एक से विदाई उनसे एक नया रिश्ता कायम करेगा. हो सकता है आगे जीवन में कभी मुलाकात न हो लेकिन बीते लम्हे चेहरे पर मुस्कान लाने के लिए काफी है और उस हर लम्हे को संजोये रखना हमारे रिश्ते को और प्रगाढ़ बनाएगा.

आशा हजारो मिलन की….

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Posted on May 2, 2013, in My Life. and tagged , , , , , . Bookmark the permalink. Leave a comment.

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