नफरत की आग….


 

नफरत की आग में
जल रहा है इंसानियत,
न जाने कब किसने और क्यों
यह आग लगाई।

जो रह सकते हैं साथ
खुशहाल होकर,
आज वो नफरत में बदहाल हैं।
दोष मढ़ देते हैं हम नेताओं पर
पर मारने और आग लगाने वाले तो हम हैं
और हमारे अपने दो हाथ।

क्यों हम उन चंद लोगों के बहकावे में आकर
क्रोधित हो उठते हैं,
क्यों नहीं हमे बहकाने वाले हमारे साथ चलते हैं।
क्यों नहीं वो उत्तेजित भीड़ का प्रतिनिधित्व करते हैं।

इस मार काट से कुछ नही मिलने वाला,
अगर मिलेगा तो सिर्फ वातावरण में फैला नफरत।

न जाने कब यह नफरत मिटेगा,
न जाने कब हम इंसान बनेंगे,
धर्म के आड़ में हम और कितना लड़ेंगे।

आपकी इस लड़ाई में,
न ही किसी की जीत होती
न ही होती किसी की हार,
अगर कुछ होता है तो वह है
सिर्फ विनाश, सिर्फ विनाश।

#notinourname

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Posted on July 4, 2017, in Social issues.. Bookmark the permalink. Leave a comment.

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