क्यों आना चाहती हो इस दुनिया में…


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तुम क्यों आना चाहती हो इस दुनिया में,
ये दुनिया तुम्हारे लिए नही,
रह जाओगी एक वस्तु बनकर
दोयम दर्जे की।
सांसे लोगी पर उस सांसो पर अधिकार किसी और का होगा,
ख्वाइशें होंगी, पर उस ख्वाइश पर हक तुम्हारा न होगा,
इंसान होगी लेकिन बस केवल आज्ञा मानने तक।

क्यों आना चाहती हो तुम इस दुनिया में,
यहां तुम्हारी पहचान न होगी,
किसी मर्द के पहचान के बिना
तुम समाज में जगह न पा पाओगी,
अपनी पहचान बनाने को कई जंजीर तुम्हे बांध रखेंगे,
बीत जाएगी तुम्हारी जिंदगी उन जंजीरो में सिसक कर।

क्यों आना चाहती हो तुम इस दुनिया में,
क्या तुम्हें मालूम नही तुम हम पर एक बोझ हो,
नहीं हैं हमारे पास धन तुम्हारे दहेज के लिए,
न दे पाऊंगा मैं तुम्हें वह शिक्षा औरों के बराबर,
न रख पाऊंगा तुम्हारे सेहत का ध्यान पूर्णतया,
क्योंकि तुम परायी हो।

क्यों आना चाहती हो तुम इस दुनिया में,
तुम हमेशा हिंसा की शिकार रहोगी,
अगर गर्भ में न मारी गई तो जन्म के बाद तुमपर तलवार लटकेगी,
अगर जिंदा बच गयी तो जिंदगी भर घरेलू हिंसा का शिकार बनोगी,
ये हिंसा तो तुम्हे अपने घर वाले देंगे,
बाहर वाले तो तुम्हे हवस का शिकार बनाने को हरपल मुस्तैद रहेंगे।

क्यों आना चाहती हो तुम इस दुनिया में,
क्या तुम्हें पता नहीं हमें हमारे धर्म और धार्मिक पुस्तक का शह प्राप्त है,
अगर तुम्हें आजादी दे दी तो धर्म भ्रष्ट हो जाएगा,
ईश्वर के पुस्तक के अनुसार तुम्हे दासी बनकर ही पुरुषों की सेवा करनी होगी,
इस पथ से भटकने पर दुम दंड की भागी होगी।

क्यों आना चाहती हो तुम इस पुरुष प्रधान दुनिया मे,
तुम केवल एक बच्चा जनने वाली यंत्र बनकर रह जाओगी….

क्यों आना चाहती हो तुम इस दुनिया में,
तुम क्यों आना चाहती हो इस दुनिया में?

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Posted on July 18, 2017, in Social issues.. Bookmark the permalink. Leave a comment.

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